शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

आधा-अधूरा इतिहास

2. आधा-अधूरा इतिहास 

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इस लेख को पूरा पढिए । मेरा यह लेख तुमुल तूफानी साप्‍ताहिक मुरादाबाद उ;प्र; के 24 सितम्‍बर 2009 अंक में छप चुका है ।)
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लेखक—आचार्य शिवप्रसादसिंह राजभर ‘’राजगुरू’’) वे बुजुर्ग मेरे पिता की उम्र के थे । नेपाली नागरिक थे । मैं अपनी पुत्री श्रद्धासिंह से मिलने नेपाल गया था ।(मेरी पुत्री श्रद्धासिंह नेपालदेश में विवाही है ।) उन्‍होंने मुझसे भारत की ताजा स्थितियों पर चर्चा की । चर्चा के दौरान मुझे लगा कि वे भारत के विषय में मुझसे अधिक जानकारी रखते हैं । मुझे आश्‍चर्य हुआ कि वे भारत की अधिकांश समस्‍याओं के लिए पण्डित जवाहरलाल नेहरू को जिम्‍मेदार मानते हैं । जब भी मैं किसी विषय पर चर्चा करता तब भी कहते ऐसा नहीं ,ऐसा है । मैंने नेपालदेश के सम्‍बंध में चर्चा प्रारम्‍भ कर दी । मैंने कहा आजकल नेपालदेश हडताल का देश हो गया है । नेपाल के पहाडी क्षेत्र और तराई क्षेत्र में काफी तनाव चल रहा है । पहाडी और तराईवासियों में हद से अधिक बैर पनप रहा है । इस पर भी उन्‍होंने कहा कि इसके लिए भी पण्डित जवाहरलाल नेहरू दोषी हैं । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि इस समस्‍या के लिए पण्डित जवाहरलाल नेहरू कैसे दोषी हो सकते हैं । उनने बतलाया कि नेपाल का तराई क्षेत्र भारत का ही हिस्‍सा था । कुछ कारणों से ईस्‍ट इण्डिया कम्‍पनी ने तराई क्षेत्र सौ डेढ सौ वर्षों के लिए नेपाल को लीज पर दे दिया था । बहुत पहले यह समय समाप्‍त हो गया किन्‍तु नेहरू जी ने इस भूमि को वापस नहीं लिया । लीजडीड एग्रीमेन्‍ट के दस्‍तावेज कलकत्‍ता में हैं लेकिन किसी ने सुधि नहीं ली । मैं उनकी बातें किस्‍सा कहानी के समान सुनने लगा । 
उन्‍होंने बताया कि उस समय जब भारत स्‍वतंत्र हुआ था तब नेपाल के महाराजाधिराज ने भारत गणराज्‍य में सम्मिलित होने की इच्‍छा जताई थी । वे दिल्‍ली जाकर सरदार वल्‍लभ भाई पटेल से मिले थे और कहा था कि आप नेपाल को भारत में विलय का मसौदा तैयार करलें मैं हस्‍ताक्षर कर दूंगा । सरदार वल्‍लभभाई पटेल इसके लिए तैयार हो गये थे ,किन्‍तु नेहरू जी ने अस्‍वीकार कर दिया था । सरदार वल्‍लभभाई के कहने पर भी उन्‍होंने अपनी जिद नहीं छोडी । यदि नेपाल भारत का अंग हो गया होता तो आज तस्‍वीर कुद और होती । 
उन्‍होंने सरदार वल्‍लभभाई पटेल के विषय में कहा कि वे बहुत जीवट वाले व्‍यक्ति थे । लौह पुरूष थे । बहुत सी ऐसी बात हैं जिन्‍हें नेहरू जी नहीं चाहते थे किन्‍तु वल्‍लभभाई पटेल ने नेहरू जी की बातों को नजरन्‍दाज कर स्‍वेच्‍छा से कार्य किया ।

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